सम्पूर्ण हिन्दी व्याकरण (Hindi Grammar)​

सम्पूर्ण हिन्दी व्याकरण (Hindi Grammar)​

स्वागत है आपका आरम्भ क्लासेज के इस ऑनलाइन पोर्टल पर। यहां इस अनुभाग में हम हिंदी व्याकरण (Hindi Grammar) के विषय में अध्ययन करेंगे। हिंदी विषय का ज्ञान एवं वर्षो का अनुभव रखने वाले विषयाध्यापकों के द्वारा यहां हिंदी व्याकरण (Hindi Vyakaran) का सम्पूर्ण अध्ययन सामग्री एवं नोट्स यहां उपलब्ध कराये गए हैं। 

अध्याय (Topic)

Hindi Grammar हिन्दी व्याकरण (Hindi Vyakaran)

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सम्पूर्ण हिन्दी व्याकरण (Hindi Grammar)

हिंदी विषय के उद्गम अथवा हिंदी व्याकरण की सम्पूर्ण जानकारी हम निचे दिए हुए कुछ खंडो में प्राप्त करेंगे। जैसे की किस प्रकार की बोली भाषा, सवैंधानिक जानकारी इत्यादि जानकारी हम यहां प्राप्त करेंगे तो आप इस लेख अथवा अध्याय को पूर्ण पढ़े। 

बोली :-

सीमित क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा सामान्यतः बोली कहलाती है। बोली का मानक व्याकरण व मानक साहित्य नहीं होता है । उदाहरणार्थ – बघेली, छत्तीसगढ़ी, मारवाड़ी आदि ।

विभाषा

विभाषा का क्षेत्र बोली की अपेक्षा बड़ा होता है । विभाषा का आधा-अधूरा व्याकरण व लोक साहित्य होता है। उदाहरणार्थ – ब्रज, अवधी, बुन्देली आदि।

भाषा

अभिव्यक्ति के माध्यम, अर्थात् – विचारों के आदान-प्रदान के साधन को भाषा कहते हैं ।

भाषा विस्तृत क्षेत्र में बोली जाती है। भाषा का मानक व्याकरण एवं मानक साहित्य होता है । भाषा के मुख्यतः दो रूप होते हैं मौखिक भाषा एवं लिखित भाषा।

इस प्रकार बोली का विकास विभाषा में तथा विभाषा का विकास भाषा में होता है ।

राष्ट्रभाषा

राजभाषा

राष्ट्रभाषा का शाब्दिक अर्थ है समस्त राष्ट्र में प्रयुक्त होने वाली भाषा, अर्थात् – जो भाषा समस्त राष्ट्र में जन-जन के

विचार-विनिमय का माध्यम हो, वह राष्ट्रभाषा कहलाती है। भारत की राष्ट्रभाषा ‘हिन्दी’ (खड़ी बोली) है। 

राजभाषा का शाब्दिक अर्थ है – राज-काज की भाषा, अर्थात् – जो भाषा देश के राजकीय कार्यों के लिए प्रयुक्त होती है, वह राजभाषा कहलाती है।

 राजभाषा को संवैधानिक मान्यता प्राप्त होती है। भारत की राजभाषा ‘हिन्दी’ (खड़ी बोली) है।

हिन्दी भाषा का विकास

हिन्दी का विकास क्रम

हिन्दी की आदि जननी संस्कृत है । हिन्दी का विकास क्रम इस प्रकार हैं :-

पाली ➯संस्कृत ➯ अपभ्रंश ➯ अवहट्ट ➯ प्राचीन हिन्दी

विश्व में लगभग 3000 भाषाएं बोली जाती हैं, जिन्हें 13 भाषा परिवारों में वर्गीकृत किया गया है। भारत में बोली जाने वाली विभिन्न भाषाएं 4 भाषा परिवार – भारोपीय, द्रविड़, आस्ट्रिक एवं चीनी-तिब्बती से संबंधित हैं। भारत में बोलने वालों के प्रतिशत के आधार पर भारोपीय परिवार सबसे बड़ा भाषा परिवार है । हिन्दी भारोपीय परिवार की भाषा है । आकृति या रूप के आधार पर हिन्दी वियोगात्मक या विश्लिष्ट भाषा है ।

हिन्दी मूलत: फारसी भाषा का शब्द है । प्राचीनकाल में भारत आने वाले ईरानियों ने सिन्धू नदी एवं इस क्षेत्र के निवासियों की भाषा सिंधी को क्रमश: हिन्दू नदी एवं हिन्दी कहा । इसका कारण यह था कि फारसी में ‘स’ को ‘ह’ एवं ‘ध’ को ‘द’ उच्चारित किया जाता है । इस प्रकार हिन्दी का नामकरण ईरानियों के द्वारा किया गया ।

हिन्दी का वर्गीकरण

सर्वप्रथम अंग्रेज अधिकारी जार्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने 1889 ई. में हिन्दी भाषा का 5 उपभाषाओं व 17 बोलियों में वर्गीकरण प्रस्तुत किया था। इनके द्वारा संपादित पुस्तक का नाम ‘ए लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया’ है।

हिन्दी अवधी बघेली > छत्तीसगढ़ी पूर्वी हिन्दी पश्चिमी हिन्दी खड़ी बोली (कौरवी ) ब्रज > बुन्देली कन्नौजी बाँगरू ( हरियाणवी ) पहाड़ी पश्चिमी पहाड़ी मध्यवर्ती पहाड़ी ( कुमाऊँनी, गढ़वाली ) राजस्थानी मारवाड़ी मेवाती मालवी ढुंढाड़ी (जयपुरी ) बिहारी भोजपुरी मगही मैथिली

इनमें से मध्य प्रदेश में बघेली, बुन्देली एवं मालवी बोलियां बोली जाती हैं । बघेली का विकास अर्द्धमागधी अपभ्रंश से, बुन्देली एवं मालवी का विकास शौरसेनी अपभ्रंश से हुआ है।

हिन्दी की संवैधानिक स्थिति

Faq

  • भाषा
  • वर्ण
  • शब्द
  • पद
  • वाक्य
  • विराम चिन्ह
  • संज्ञा
  • सर्वनाम

हिंदी व्याकरण के मुख्य तौर पर तीन अंग होते हैं जिनके नाम वर्ण-विचार, शब्द-विचार तथा वाक्य विचार है।

 
किसी जाति, द्रव्य, गुण, भाव, व्यक्ति, स्थान और क्रिया आदि के नाम को संज्ञा कहते हैं। जैसे – पशु (जाति), सुन्दरता (गुण), व्यथा (भाव), मोहन (व्यक्ति), दिल्ली (स्थान), मारना (क्रिया)। जिस संज्ञा शब्द से पदार्थों की अवस्था, गुण-दोष, भाव या दशा, धर्म आदि का बोध हो उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं।